इंदौर में मोबाइल लैब सात महीने से खड़ी होने के कारण खाद्य जांच के लिए दस दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। यह स्थिति खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और आम उपभोक्ता की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर रही है।
इंदौर की खाद्य जांच लैब को FSSAI की मंजूरी का इंतजार
इंदौर में स्थापित स्टेट-ऑफ-द-आर्ट खाद्य और दवा परीक्षण लैब को NABL से प्रमाणित तो किया गया, लेकिन एफएसएसएआई की अंतिम मंजूरी अब तक नहीं मिली। इसलिए, लैब की पूरी तरह से संचालन शुरू नहीं हो पाया।
इस वजह से खाद्य सुरक्षा विभाग को भोपाल की राज्य स्तरीय लैब पर निर्भर रहना पड़ता है, जहां खाद्य नमूनों का परीक्षण किया जाता है।
भोपाल लैब पर निर्भरता से जांच में हो रही देरी
भोपाल लैब से रिपोर्ट आने में औसतन दस दिन से लेकर कई महीनों तक का समय लग जाता है। इस देरी के कारण मिलावटखोरों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई करना मुश्किल हो गया है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर जांच न होने की वजह से प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
त्योहारी सीजन में मोबाइल लैब का सीमित संचालन
त्योहारों जैसे नवरात्रि और दीपावली के अवसर पर इंदौर में मोबाइल टेस्टिंग वैन (वाहन क्रमांक MP02AV7408) के माध्यम से ऑन-स्पॉट जांच और जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।
हालांकि, यह व्यवस्था सीमित और अस्थायी है, जो पूरे साल खाद्य सुरक्षा की गारंटी नहीं दे पाती।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई
इंदौर के खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष स्वामी और उनकी टीम ने अमानक खाद्य पदार्थों की पहचान कर रजिस्ट्रेशन निलंबन, सैंपल जब्ती और लीगल सैंपलिंग की कार्रवाई की है।
यह कदम खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं, लेकिन लैब की उपलब्धता के अभाव में कार्रवाई प्रभावित हो रही है।
छत्तीसगढ़ की मोबाइल लैब इकाइयां भी सात महीने से बंद
राज्य स्तर पर छत्तीसगढ़ की नौ मोबाइल लैबें भी केंद्र सरकार से फंड न मिलने के कारण सात महीने से बंद हैं। इससे खाद्य जांच में और भी अधिक देरी हो रही है।
यह समस्या पूरे क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की स्थिरता पर प्रश्न चिन्ह लगाती है।
आम लोगों के लिए जांच में देरी का प्रभाव
खाद्य जांच में देरी से उपभोक्ताओं को मिलावटखोरों के शिकार होने का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही त्वरित कानूनी उपायों के अभाव में बाजार में अमानक खाद्य पदार्थ टिकते हैं।
इस स्थिति में खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका और संसाधनों की उपलब्धता पर गंभीर ध्यान देने की आवश्यकता है।
