इंदौर जिला जल अभावग्रस्त घोषित कर दिया गया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने 27 अक्टूबर 2026 को पूरे जिले में निजी बोरिंग पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। यह कदम इंदौर में भूजल स्तर के लगातार गिरते रहने और वर्षा में कमी के कारण उठाया गया है।

जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित करने का कारण

इस वर्ष इंदौर में औसत वर्षा की तुलना में लगभग 27% कम वर्षा हुई है। इसके साथ ही भूजल का अत्यधिक दोहन पेयजल स्रोतों पर दबाव बढ़ा रहा है। इसलिए प्रशासन ने मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम, 1986 एवं उसके संशोधन 2002 के तहत जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को जल अभावग्रस्त घोषित किया है।

इससे भविष्य में संभावित पेयजल संकट को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।

इंदौर जल अभावग्रस्त क्षेत्र में निजी बोरिंग पर रोक का आदेश

निजी बोरिंग पर पूरी तरह रोक

आदेश के अनुसार इंदौर जिले में निजी और अशासकीय नलकूप खनन पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगाई गई है। यह प्रतिबंध आगामी आदेश तक लागू रहेगा।

सरकारी पेयजल योजनाओं के अंतर्गत किए जाने वाले नलकूप इस रोक से मुक्त रहेंगे। आपात स्थिति में सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से ही निजी बोरिंग की अनुमति दी जाएगी।

प्रतिबंध उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई

मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम की धारा 3 तथा 4 के तहत, आदेश का उल्लंघन करने पर ₹2,000 तक का जुर्माना, दो साल तक की जेल या दोनों सजाएं हो सकती हैं।

साथ ही, प्रतिबंध के बावजूद बोरिंग करने वाले वाहनों और मशीनों को जब्त करने का अधिकार राजस्व, पुलिस एवं नगर निगम अधिकारियों को दिया गया है। इससे अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी।

कलेक्टर शिवम वर्मा का बयान

कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि जल संरक्षण और सतत जल प्रबंधन के लिए यह कदम जरूरी था। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे जल के संरक्षण में सहयोग करें और अवैध बोरिंग न कराएं।

उनका कहना है कि इस आदेश का उद्देश्य भूजल स्तर को स्थिर करना और आने वाले समय में जल संकट से बचाव करना है।

जल अभावग्रस्त घोषित होने का आम जनता पर प्रभाव

इस प्रतिबंध के कारण निजी जल कूप बनाने वाले लोग असुविधा का सामना कर सकते हैं। हालांकि, प्रशासन का मानना है कि यह कदम दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

आम जनता को जल संरक्षण के प्रति जागरूक होकर पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करना होगा ताकि जल संकट से बचा जा सके।

भविष्य में जल संरक्षण के लिए प्रशासन की योजनाएं

जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित करने के साथ-साथ प्रशासन जल संरक्षण के लिए अन्य उपाय भी कर रहा है। जैसे वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का संरक्षण और सार्वजनिक जागरूकता अभियान।

इसके अलावा, भूजल स्तर की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि जल संकट को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।


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