इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण में हाल ही में नए सीईओ ने कार्यभार संभाला है, लेकिन कामकाज का ढर्रा वही पुराना है। खास बात यह कि यहां जब भी कोई नया सीईओ आता है अपना एक-न-एक दूत चुन लेता है। अब नए सीईओ के नए दूत भी बन गए हैं।

उल्लेखनीय है कि पहले आईडीए में कोई भी काम हो तो भूमाफिया से लेकर अफसर तक सुदीप मीणा को याद किया करते थे। कहा जाता है कि मीणा जी की पहुंच सीईओ तक सबसे अधिक थी। अब संपदा अधिकारी श्यामू श्रीवास्तव नए सीईओ के नए दूत बने हैं।

आईडीए की रिमोट अब श्रीवास्तव के पास

आईडीए में इन दिनों में सबसे ज्यादा चर्चा श्यामू श्रीवास्तव की हो रही है। लोग हर तरह के आड़े-तिरछे, टेढ़े-मेढ़े काम के लिए श्रीवास्तवजी को याद कर रहे हैं। बताया जाता है कि श्यामू जी इन दिनों ने सीईओ के आंख-कान-नाक बने हुए हैं।

पहले सीईओ ने नहीं दिया था भाव

इसके पूर्व में जो सीईओ थे, उनके कार्यकाल में श्यामू जी को भाव नहीं मिला था। यहां तक की कार्यभार संभालने में भी पसीने छूट गए थे। काफी पापड़ बेलने के बाद श्यामू जी कुर्सी पर बैठ पाए थे। अब इनके बल्ले-बल्ले हैं।

संभागायुक्त का हो गया है मोहभंग

वर्तमान में आईडीए के अध्यक्ष पद की कमान संभागायुक्त के पास है। शुरू-शुरू में उन्होंने आईडीए की लगाम कसने की कोशिश की। कई बैठकें ली, अफसरों को फटकार भी लगाई। ऐसा लगा था कि आईडीए का कामकाज अब पटरी आ जाएगा, लेकिन अब उन्होंने भी हाथ खींच लिया है। शायद इसका कारण आईडीए में चल रहे लगातार विवाद हो सकते हैं।

शालीमार टाउनशिप के पास की जमीन हारा आईडीए

हाल ही में एक मामले में आईडीए की बुरी तरह हार हुई है। एबी रोड पर शालीमार टाउनशिप के पास स्थित 3.176 हेक्टेयर जमीन का है। यह जमीन आईडीए की योजना क्रमांक 114 पार्ट-2 के अंतर्गत आती है। 15 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने रेवाचंद और अन्य की याचिका स्वीकार करते हुए जमीन के अधिग्रहण को समाप्त घोषित कर दिया। अदालत के सामने यह तथ्य था कि जमीन के लिए अधिग्रहण अवॉर्ड 27 नवंबर 1992 को पारित हुआ था, लेकिन अधिकारियों ने न तो जमीन का कब्जा लिया था और न ही मुआवजा दिया था। इसी आधार पर अधिग्रहण को कायम नहीं रखा जा सका। अदालत ने जमीन का कब्जा लेने से संबंधित प्राधिकरण के पत्रों को भी निरस्त कर दिया। इस जमीन की बाजार कीमत करीब एक हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है।

अयोध्यापुरी में सिम्पलेक्स से मिली थी हार

अयोध्यापुरी कॉलोनी की करीब चार एकड़ जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। हाल ही में इस मामले में आईडीए को हार मिली है। देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था द्वारा सिम्पलेक्स कंपनी के पक्ष में की गई रजिस्ट्री को वैध माना और अयोध्यापुरी रहवासी कल्याण संघ के दावों को खारिज कर दिया। जमीन की अनुमानित कीमत करीब 350 करोड़ रुपये बताई गई है। फैसले के बाद रहवासी पक्ष ने हाईकोर्ट जाने की बात कही है।

लंबे समय से आईडीए पर हावी हैं भूमाफिया

आईडीए पर लंबे समय से भूमाफियाओं के सपोर्ट के आरोप लगाए जाते रहे हैं। हाल ही में कई ऐसे मामले हुए हैं, जिनमें आईडीए भूमाफियाओं की मदद करता नजर आया है। अफसर बदल जाते हैं, लेकिन भूमाफियाओं की पकड़ कमजोर नहीं होती।


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