बद्रीनाथ धाम कपाट बंद होने की तारीख तय हो गई है। श्रद्धालु 16 नवंबर 2026 की रात 9:37 बजे तक ही श्री बद्रीनाथ धाम में दर्शन कर सकते हैं। इसके बाद कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। यह समय धार्मिक पंचांग गणना और मंदिर समिति की बैठक के बाद निर्धारित किया गया है।
बद्रीनाथ धाम कपाट बंद होने की तिथि और समय की घोषणा
बद्रीनाथ धाम कपाट बंद होने की तिथि का शुभ मुहूर्त 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के पावन अवसर पर घोषित किया गया। इस घोषणा के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक समारोह आयोजित किया गया। पंचांग गणना के आधार पर रावल और धर्माधिकारी इसे अंतिम रूप दिया।
इस प्रकार 16 नवंबर 2026 को रात 9:37 बजे कपाट बंद किए जाएंगे। यह समय श्रद्धालुओं के लिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसके बाद वे धाम में पूजा-अर्चना नहीं कर पाएंगे।

शीतकालीन प्रवास के लिए देवडोलियों का प्रस्थान
बद्रीनाथ धाम कपाट बंद होने के एक दिन बाद, 17 नवंबर 2026 को भगवान की देवडोलियां अपने शीतकालीन प्रवास स्थलों की ओर रवाना होंगी। यह प्रस्थान परंपरा के अनुसार हर वर्ष होती है। देवडोलियां जोशीमठ स्थित नृसिंह मंदिर तक जाती हैं।
इस दौरान मुख्य मंदिर के कपाट बंद रहेंगे और पूजा-समारोह नृसिंह मंदिर में आयोजित होंगे। भक्तजन भी इस स्थान पर भगवान बद्री विशाल के दर्शन कर सकते हैं।
बद्रीनाथ धाम कपाट बंद होने का धार्मिक महत्व
बद्रीनाथ धाम कपाट बंद होना एक धार्मिक प्रक्रिया है जो मौसम के अनुसार निर्धारित होती है। शीतकाल में बद्रीनाथ क्षेत्र में भारी बर्फबारी और ठंड पड़ती है। इसलिए कपाट बंद कर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर की देखभाल सुनिश्चित की जाती है।
इस अवधि में पूजा-आराधना जोशीमठ में होती है। यह प्रक्रिया हजारों वर्षों से चली आ रही है और श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की अंतिम समय-सीमा
बद्रीनाथ धाम कपाट बंद होने से पहले श्रद्धालु 16 नवंबर की रात 9:37 बजे तक मंदिर में दर्शन कर सकते हैं। इसके बाद मंदिर के कपाट बंद हो जाएंगे और शीतकालीन पूजा शुरू हो जाएगी।
श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने यात्रा की योजना समयानुसार बनाएं ताकि वे अंतिम दिन दर्शन का लाभ उठा सकें। इसके अलावा, मौसम की खराबी को ध्यान में रखते हुए जल्द आने की व्यवस्था करें।
बदरी-केदार मंदिर समिति की भूमिका
बद्रीनाथ धाम कपाट बंद होने की तिथि निर्धारण में बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) की अहम भूमिका होती है। समिति धार्मिक विधि-विधान के अनुसार पंचांग गणना करती है।
इसके अलावा, समिति मंदिर परिसर की सुरक्षा, साफ-सफाई और शीतकालीन व्यवस्थाओं का ध्यान रखती है। समिति के निर्णय श्रद्धालुओं और प्रशासन के लिए मार्गदर्शक होते हैं।
आगे क्या होगा: कपाट बंद के बाद की तैयारियां
कपाट बंद होने के बाद मंदिर परिसर में शीतकालीन बंदोबस्त शुरू हो जाएगा। पूजा-स्थलों का स्थानांतरण जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में होगा। वहां भगवान बद्री विशाल की पूजा-अर्चना नियमित रूप से होती रहेगी।
इसके अलावा, मंदिर समिति धाम में आवश्यक रख-रखाव और सुधार कार्य करेगी ताकि अगली यात्रा के लिए सभी तैयारियां पूर्ण हों। श्रद्धालुओं के लिए शीतकालीन अवधि में भी धार्मिक गतिविधियां जारी रहेंगी।
