इंदौर में रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए प्रस्तावित पेड़ों की कटाई पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। यह रोक विशेष रूप से चोरल, सिमरोल और बड़वाह के जंगलों में 2.5 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई को लेकर लागू की गई है।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रेलवे ट्रैक के लिए पेड़ों की कटाई पर अंतरिम रोक लगाई

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की युगल पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोकजे और न्यायमूर्ति विनय सराफ शामिल हैं, ने रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए प्रस्तावित पेड़ों की कटाई पर अंतरिम रोक लगा दी। इस आदेश के तहत चोरल वन परिक्षेत्र में 2.5 लाख से अधिक पेड़ काटे जाने से रोका गया है। अदालत ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार, वन विभाग और रेलवे को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

इंदौर में रेलवे ट्रैक के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक

चोरल के जंगलों में वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास खतरे में

चोरल के जंगल बाघ, तेंदुए, चीतल, सांभर और लोमड़ी जैसे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास हैं। इतने बड़े पैमाने पर पेड़ कटने से न केवल वन्यजीवों का आवास प्रभावित होगा, बल्कि मालवा-निमाड़ क्षेत्र में तापमान वृद्धि और वर्षा चक्र में असंतुलन की आशंका भी है। याचिकाकर्ता करण बैरागी ने अदालत में कहा कि पहले से ही चोरल रेंज में लगभग 80,000 पेड़ काटे जा चुके हैं।

परियोजना के कारण इंदौर और आसपास के क्षेत्र में पर्यावरणीय संकट

रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए प्रस्तावित कटाई से क्षेत्र का पर्यावरण संकट गहरा सकता है। पिछले पांच वर्षों में इंदौर में गर्मियों में तापमान 45 डिग्री तक पहुंच चुका है। इतने बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जाने से शहर की तापनशीलता बढ़ेगी और आसपास के क्षेत्र में प्राकृतिक जलवायु प्रभावित होगी। यह स्थिति आम नागरिकों के लिए स्वास्थ्य और जीवन शैली पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

याचिका और अदालत की सुनवाई की प्रक्रिया

जनहित याचिका करण बैरागी द्वारा दायर की गई थी, जिसकी पैरवी अधिवक्ता मनीष यादव और मेहुल वर्मा ने की। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वन भूमि के डायवर्जन और पेड़ों की कटाई से जुड़े सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

रेलवे परियोजना का डिजाइन और कटाई की बढ़ती संख्या

रेलवे ने शुरुआत में 40-50 हजार पेड़ों के कटने की योजना बनाई थी। हालांकि, डिजाइन में बदलाव के कारण चोरल से बड़वाह तक ट्रैक की दूरी बढ़ गई जिससे पेड़ों की कटाई 2.5 लाख से अधिक हो गई। अदालत ने इस पर चिंता जताई कि क्या वास्तव में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं, क्योंकि इससे पर्यावरणीय नुकसान होगा।

हाईकोर्ट के आदेश से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा

हाईकोर्ट ने चोरल के जंगल बचाने के लिए तत्काल रोक लगाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अदालत ने वानिकी, वन्यजीव और पर्यावरण विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र समिति गठित करने की भी मांग की है, जो परियोजना के प्रभावों का निष्पक्ष मूल्यांकन करेगी। यह कदम स्थानीय पारिस्थितिकी और वन्यजीवों के लिए राहत देने वाला माना जा रहा है।


Category :