मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा शुरू की गई सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा ने राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही क्षेत्रों में हलचल मचा दी है। इस यात्रा को लेकर साध्वी हर्षानंद गिरी ने कड़ी आलोचना की है और दिग्विजय सिंह पर सनातन धर्म के मुद्दों को अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।

दिग्विजय सिंह ने 20 अक्टूबर से शुरू की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा

दिग्विजय सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के दिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से अपनी पदयात्रा की शुरुआत की। यह यात्रा करीब 950 किलोमीटर लंबी होगी, जो मध्य प्रदेश के शाजापुर, राजगढ़, अशोकनगर जैसे जिलों से होते हुए उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम धाम तक पहुंचेगी।

यात्रा लगभग 70 दिनों तक चलेगी और इसके दौरान धार्मिक स्थलों में पारदर्शिता और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर जागरूकता फैलाने का लक्ष्य रखा गया है।

धर्म रथ पूजन में कन्याओं ने किया विशेष योगदान

18 अक्टूबर 2026 को उज्जैन के शास्त्री नगर में यात्रा के ‘धर्म रथ’ का पूजन कन्याओं के हाथों हुआ। इस अवसर पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह यात्रा सनातन धर्म के प्रमुख आदर्शों को पुनः स्थापित करने की एक पहल है।

धर्म रथ में भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्तियां रखी गई हैं, साथ ही देश की पांच पवित्र नदियों का जल भी रखा गया है।

साध्वी हर्षानंद गिरी ने यात्रा के उद्देश्य पर उठाए सवाल

पूर्व अभिनेत्री से साध्वी बनीं हर्षानंद गिरी ने इस यात्रा के समय और मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दिग्विजय सिंह और अन्य राजनीतिक नेताओं पर सनातन धर्म के मुद्दों को चुनावी और व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए उपयोग करने का आरोप लगाया।

>

साध्वी हर्षानंद ने उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर के विस्थापन और आश्रमों में महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी अपनी बेबाक राय रखी है, जिससे उनकी दिग्विजय सिंह की यात्रा पर तीखी प्रतिक्रिया आई है।

यात्रा की मार्ग और व्यवस्था

सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से होकर गुजरेगी। इसमें शाजापुर, राजगढ़, अशोकनगर, ओरछा, उरई, कालपी जैसे स्थान शामिल हैं।

यात्रा के दौरान प्रतिदिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलने का लक्ष्य है। स्थानीय लोग यात्रियों के भोजन और ठहरने की व्यवस्था कर रहे हैं। इस पूरी व्यवस्था पर प्रति दिन 30 से 50 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है।

शंकराचार्यों का यात्रा को आशीर्वाद

दिग्विजय सिंह ने बताया कि इस धार्मिक पदयात्रा को द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती और ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त है।

यह आशीर्वाद यात्रा के उद्देश्य और उसके धार्मिक महत्व को और भी पुष्ट करता है। साथ ही यह दर्शाता है कि यात्रा के आयोजक धार्मिक नेतृत्व के समर्थन से इसे आगे बढ़ा रहे हैं।

सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव

सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह यात्रा सनातन धर्म के मूल आदर्शों को जनता के बीच पुनः स्थापित करने का प्रयास है।

हालांकि, साध्वी हर्षानंद जैसे आलोचक इसे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मानते हैं। यह बहस आने वाले चुनावों और राजनीतिक माहौल में और भी तेज हो सकती है।

आम जनता पर इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि यात्रा के दौरान उठाए गए विषय और संवाद कितने सार्थक और पारदर्शी रहेंगे।

सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के दौरान साध्वी हर्षानंद गिरी का कटाक्ष


Category :