बेरछा रेंज में बम फटने से घायल ग्रामीण की मौत की खबर ने इंदौर जिले में शोक की लहर दौड़ा दी है। यह दुखद घटना महू तहसील के बेरछा फायरिंग रेंज के जंगलों में हुई, जहां 55 वर्षीय हजारीलाल गिरवाल की सेना के पुराने बम के फटने से गंभीर चोटें आईं थीं।
बेरछा रेंज में बम फटने से घायल ग्रामीण की मौत कैसे हुई?
हजारीलाल गिरवाल, जो कैलोद कुटी गांव के रहने वाले थे, लकड़ी बीनने के लिए बेरछा रेंज के जंगल गए थे। वहां उन्होंने जमीन पर पड़े एक पुरानी सेना की जिंदा बम (शेल) को अनजाने में छू लिया, जो अचानक फट गया। इस विस्फोट में उनके शरीर पर गंभीर चोटें आईं, खासतौर पर उनकी पीठ छलनी हो गई।

घायल ग्रामीण को मिला प्रारंभिक चिकित्सा उपचार
विस्फोट के बाद हजारीलाल ने अपने बेटे आकाश को फोन कर स्थिति की जानकारी दी। इसके बाद वे तुरंत महू के मध्य भारत अस्पताल ले जाए गए। अस्पताल में प्राथमिक उपचार के दौरान डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें इंदौर के एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया।
इंदौर एमवाय अस्पताल में इलाज के दौरान मौत
इंदौर के एमवाय अस्पताल में हजारीलाल गिरवाल का इलाज जारी था। हालांकि, उनकी चोटें इतनी गंभीर थीं कि अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। यह घटना परिवार और स्थानीय समुदाय के लिए बेहद दुखद साबित हुई।
पुलिस और सेना की संयुक्त जांच जारी
यह मामला बड़गोंदा थाना क्षेत्र का है। स्थानीय पुलिस और सेना के अधिकारी मिलकर घटना की जांच कर रहे हैं। वे इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि बम कैसे जंगल में पड़ा था और क्या सुरक्षा प्रबंधों में कोई चूक हुई।
बेरछा रेंज में बम फटने से घायल ग्रामीण की मौत का आम आदमी पर असर
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। बेरछा रेंज के आसपास के ग्रामीण जंगल में लकड़ी बीनने या अन्य कामों के लिए जाते हैं। ऐसे में पुरानी विस्फोटक सामग्री की मौजूदगी खतरे की घंटी है। इससे ग्रामीणों की जान को बड़ा खतरा हो सकता है।
आगे की कार्रवाई और सुरक्षा उपाय
सेना और प्रशासन को इस घटना से सबक लेकर जंगलों में विस्फोटक सामग्री की खोज और उसे सुरक्षित तरीके से नष्ट करने की प्रक्रिया तेज करनी होगी। साथ ही स्थानीय लोगों को भी ऐसे खतरों के प्रति जागरूक करना जरूरी है। इससे भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा।
