ओंकारेश्वर मंदिर विस्तार पर विवाद के चलते प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधि और संत समाज ने एक वर्चुअल बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में ममलेश्वर लोक नामक प्रस्तावित कॉरिडोर के निर्माण और मंदिर परिसर के विस्तार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

विवाद की मुख्य वजह: ममलेश्वर लोक प्रस्ताव

मध्यप्रदेश सरकार ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत ओंकारेश्वर में लगभग ₹120 करोड़ की लागत से ममलेश्वर लोक कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखा था। यह परियोजना मंदिर परिसर के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण मानी गई। हालांकि, सर्वेक्षण के दौरान करीब 400 दुकानों, आवासीय मकानों और आश्रमों के टूटने की आशंका ने स्थानीय लोगों में भारी विरोध उत्पन्न कर दिया।

स्थानीय विरोध और बंदी का असर

ममलेश्वर लोक परियोजना के कारण विस्थापन की संभावना से स्थानीय व्यापारी, निवासियों और संत समाज में गुस्सा बढ़ा। उन्होंने 2-3 दिनों की पूर्ण बंदी का ऐलान कर विरोध जताया। व्यापारिक गतिविधियां ठप हो गईं, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई। स्थानीय लोग डुकिया में पुनर्वास के प्रस्ताव को भी स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

प्रशासनिक संवाद और वर्चुअल बैठक

विरोध बढ़ने पर खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता और अपर कलेक्टर काशीराम बडोले ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, संतों और व्यापारिक संगठनों के साथ वर्चुअल माध्यम से चर्चा की। सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल और विधायक नारायण पटेल की मध्यस्थता में यह बैठक हुई। प्रशासन ने प्रभावितों की मांगों को समझने और समाधान खोजने का प्रयास किया।

प्रस्तावित प्रोजेक्ट को रद्द करने का फैसला

जनविरोध और संतों की आपत्तियों को देखते हुए प्रशासन ने ममलेश्वर लोक परियोजना को उस स्थान के लिए रद्द कर दिया। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि विस्थापन और विरोध को देखते हुए ₹120 करोड़ की इस योजना को निरस्त किया गया है। इस निर्णय से स्थानीय लोगों में राहत की भावना है।

भविष्य में विकास कार्यों के लिए सहमति जरूरी

खंडवा प्रशासन ने आश्वासन दिया कि ओंकारेश्वर में भविष्य में श्रद्धालुओं की सुविधा और परिसर विस्तार के लिए कोई भी निर्माण कार्य संत समाज, दुकानदारों और हितधारकों की सहमति के बिना नहीं किया जाएगा। इससे संवाद और सहयोग की प्रक्रिया मजबूत होगी।

आगे क्या हो सकता है?

प्रशासन स्थानीय लोगों और संतों के साथ लगातार बातचीत जारी रखेगा। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए डुकिया में कॉलोनी विकसित करने का प्रस्ताव है, लेकिन इसे लेकर अभी सहमति बननी बाकी है। विवाद के समाधान के लिए निरंतर संवाद आवश्यक होगा, ताकि ओंकारेश्वर का धार्मिक और सामाजिक महत्व बना रहे।


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