रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार आठवें कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ है। इस दौरान रुपये की मजबूती में ‘जियो आईपीओ’ और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रणनीतियों का अहम योगदान रहा है। 21 अक्टूबर को रुपया 94.62 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला, जो पिछले बंद भाव से 29 पैसे अधिक है, और दिन में 94.50 के छह सप्ताह के उच्चतम स्तर को भी छू गया।

रुपया डॉलर के मुकाबले आठवें दिन भी मजबूत बना रहा

विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की यह लगातार आठवीं बढ़त विदेशी निवेश और RBI के हस्तक्षेप से प्रेरित है। सोमवार को रुपया 94.91 पर बंद हुआ था, जबकि मंगलवार को दशहरे के कारण बाजार बंद रहा। बुधवार को जियो आईपीओ के जरिए विदेशी पूंजी के प्रवाह ने रुपये को मजबूती दी।

इसके अलावा, RBI ने डॉलर की मांग को नियंत्रित करते हुए बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप किया, जिससे रुपये की रिकवरी को और बल मिला। विदेशी निवेशकों ने भी आईपीओ आवंटन प्रक्रिया के दौरान डॉलर बेचकर रुपये खरीदे, जिससे विनिमय दर पर सकारात्मक असर पड़ा।

रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होता हुआ

जियो आईपीओ से विदेशी पूंजी के आकर्षित होने का असर

मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का मेगा आईपीओ विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। 21 अक्टूबर से खुला यह आईपीओ लगभग 30 हजार करोड़ रुपये के स्तर पर है। इसके कारण विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर इनफ्लो तेजी से बढ़ा।

विदेशी निवेशक आईपीओ आवंटन के लिए डॉलर बेचकर रुपये खरीद रहे हैं, जो रुपये की मजबूती में सहायक है। साथ ही, ग्रे मार्केट में भी जियो आईपीओ का प्रीमियम बढ़ रहा है, जो बाजार की सकारात्मक धारणा को दर्शाता है।

आरबीआई की रणनीति से रुपये को मिला समर्थन

भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप करते हुए रुपये की गिरावट को रोकने के लिए कदम उठाए हैं। डॉलर की मांग को नियंत्रित करना और नकदी प्रवाह को संतुलित करना RBI की मुख्य रणनीति रही।

आरबीआई की एफसीएनआर (B) योजनाओं के तहत विदेशी मुद्रा जमा में भी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है, जिससे रुपये पर दबाव कम हुआ है। इसके साथ ही, डॉलर-रुपये की स्वैप सुविधा ने भी बाजार को स्थिरता प्रदान की है।

रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होता हुआ

घरेलू शेयर बाजार की तेजी से हुई रुपये को मजबूती

वहीं, घरेलू शेयर बाजार में भी तेजी ने रुपये को सहारा दिया। 21 अक्टूबर को सेंसेक्स 665.10 अंक चढ़कर 74,518 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी भी 188.40 अंक की बढ़त के साथ 23,077.35 पर बंद हुआ।

शेयर बाजार में यह सकारात्मक रुख विदेशी निवेशकों और घरेलू निवेशकों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है, जिससे रुपया निवेश के लिए आकर्षक बना हुआ है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर की मजबूती ने बढ़त को सीमित किया

हालांकि रुपये में मजबूती आई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 110.33 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने और डॉलर इंडेक्स 101.58 के स्तर पर मजबूती बनाए रखने के कारण रुपये की बढ़त सीमित रही।

तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए आयात महंगी बनाती हैं, जिससे रुपये पर दबाव आता है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती का मतलब है कि वैश्विक स्तर पर डॉलर की मांग बनी हुई है, जो रुपये को कमजोर कर सकती है।

आगे की संभावनाएं और बाजार की दिशा

जियो आईपीओ के सफल समापन और विदेशी निवेश में निरंतर प्रवाह से रुपये की मजबूती बनी रह सकती है। RBI का सक्रिय हस्तक्षेप भी बाजार को स्थिर बनाए रखने में मदद करेगा।

फिर भी, वैश्विक तेल की कीमतों और डॉलर की मजबूती पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा। घरेलू शेयर बाजार की चाल भी रुपये की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आम निवेशकों के लिए यह समय सावधानी से निवेश करने का है, क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव संभव है।


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