अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास की सजा के बावजूद परिजन और विपक्ष अभी भी न्याय की पूरी प्रक्रिया और ‘वीआईपी’ पहलू की जांच की मांग कर रहे हैं।

दिल्ली के इंडिया गेट पर अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग

14 और 15 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के इंडिया गेट पर अंकिता भंडारी के माता-पिता ने न्याय की मांग को लेकर धरना दिया। उन्होंने भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम राज्यपाल नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग की। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, लेकिन बाद में रिहा कर दिया गया।

अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया कि वह दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो देशभर में विरोध प्रदर्शन होंगे।

अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन करते लोग

मुख्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा

30 मई 2025 को कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र अदालत ने अंकिता भंडारी की हत्या के मुख्य आरोपियों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला एसआईटी की 88 दिनों में तैयार की गई 500 पन्नों की चार्जशीट के आधार पर दिया गया।

उत्तराखंड पुलिस ने इस मामले में अपनी कार्रवाई को लेकर प्रेस नोट जारी कर बताया कि न्यायालय ने सजा सुनाकर मामले में न्याय सुनिश्चित किया है।

राजनीतिक दलों का विरोध और समर्थन

अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग और दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के विरोध में कांग्रेस समेत कई विपक्षी नेता दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, सुप्रिया श्रीनेत, पवन खेड़ा समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इंडिया गेट पर जाकर प्रदर्शन का समर्थन किया।

कांग्रेस ने देहरादून में भी कैंडल मार्च निकाला और भाजपा सरकार पर आरोप लगाए कि वह न्याय की मांग करने वाले परिवार के प्रति असंवेदनशील है।

अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन करते लोग

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की प्रतिक्रिया

15 अक्टूबर की तड़के दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट पर जमा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। हालांकि, कुछ घंटों बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। परिजनों ने पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा की और कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं।

अंकिता की मां ने कहा कि जब तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द नहीं होती, वे अपनी मांगों पर अडिग रहेंगी। उन्होंने भूख हड़ताल की चेतावनी भी दी।

अंकिता भंडारी हत्याकांड का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव

अंकिता भंडारी हत्याकांड ने उत्तराखंड और देशभर में महिलाओं की सुरक्षा और राजनीतिक हस्तक्षेप पर नई बहस छेड़ी है। इस मामले ने आम जनता में न्याय व्यवस्था और राजनीतिक नियुक्तियों पर सवाल उठाए हैं।

आगे चलकर इस मुद्दे पर सियासी दबाव बढ़ने की संभावना है, जो सरकार के लिए चुनौती बन सकता है। न्याय मिलने तक इस संघर्ष का जारी रहना तय माना जा रहा है।

सीबीआई जांच और भविष्य की संभावनाएं

परिजन और विपक्षी दल सीबीआई द्वारा मामले में ‘वीआईपी’ पहलू की जांच की मांग कर रहे हैं। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं, तो यह राजनीतिक और कानूनी दोनों ही स्तरों पर बड़ा असर डाल सकता है।

इस बीच, सरकार पर दबाव बना हुआ है कि वह मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे और न्याय को प्रभावित न होने दे।


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