इंदौर। मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का अपने घर में लगे आरओ से निकलने वाले वेस्टेज पानी को जमा कर दोबारा इस्तेमाल करने का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। मंत्री इस वीडियो में लोगों को पानी बचाने की सलाह देते दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो में उनके घर दो-दो आरओ लगे दिख रहे हैं। उनका कहना है कि आरओ से निकलने वाले पानी को नाली में बहाने के बजाय कपड़े धोने, फर्श साफ करने, बर्तन धोने और बागवानी जैसे कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

बड़ा सवाल-क्या नर्मदा का पानी शुद्ध नहीं?

पानी बचाने की यह अपील अपनी जगह सही है, लेकिन इस वीडियो ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है। इंदौर में नर्मदा का पानी फिल्टर प्लांट से शुद्ध होकर घरों तक पहुंचाए जाने का दावा किया जाता है। जब मंत्री खुद नर्मदा के पानी को साफ बताते रहे हैं, तो उनके घर में पीने के पानी के लिए आरओ की जरूरत क्यों पड़ रही है?

वीडियो में मंत्री के घर में दिख रहे दो आरओ

वीडियो में मत्री विजयवर्गीय के घर दो आरओ लगे दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में करीब 25 से 30 लोग रहते हैं और रोजाना 300 से 400 लोगों का आना-जाना होता है। ऐसे में आरओ से निकलने वाले पानी को बचाने के लिए उन्होंने नीले ड्रम रखे हैं, जिनमें पानी इकट्ठा किया जाता है। मंत्री के मुताबिक, एक गिलास पीने योग्य पानी तैयार होने पर लगभग दो गिलास पानी वेस्टेज के रूप में निकलता है। इस पानी को फेंकने के बजाय घरेलू कामों में इस्तेमाल किया जा रहा है। विजयवर्गीय ने मालवा-निमाड़ क्षेत्र में इस बार कम बारिश का हवाला देते हुए लोगों से अभी से पानी बचाने की अपील की है। उन्होंने आशंका जताई कि आने वाली गर्मियों में पानी की कमी हो सकती है। सवाल यह है कि पानी बचाने की अपील के साथ-साथ क्या शहरवासियों को यह भरोसा भी नहीं मिलना चाहिए कि उनके घरों में पहुंच रहा नर्मदा का पानी सीधे पीने के लिए सुरक्षित है?

नर्मदा के पानी के फिल्टर होने का दावा

इंदौर की जलापूर्ति व्यवस्था में नर्मदा का पानी प्रमुख स्रोत है। नगर निगम द्वारा दावा किया जाता है कि इसे फिल्टर प्लांट में उपचारित करने के बाद शहर में वितरित किया जाता है। फिल्टर प्लांट से पानी का उपचार होना और हर घर के नल तक सुरक्षित पानी पहुंचना दो अलग-अलग बातें हैं। पाइपलाइन में रिसाव, सीवेज का मिलना या वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर सकती है।

मंत्री की विधानसभा में गंदे पानी से मरे थे लोग

यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विजयवर्गीय की विधानसभा क्षेत्र-एक के अंतर्गत आने वाले इंदौर के भागीरथपुरा में दिसंबर 2025 के अंत में दूषित पेयजल का गंभीर मामला सामने आया था। दूषित पानी से उल्टी-दस्त फैलने के बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए और कई लोगों की मौत हुई।

भागीरथपुरा की घटना से तो नहीं डरे मंत्री

मध्यप्रदेश विधानसभा में 27 फरवरी 2026 को दिए गए लिखित जवाब के अनुसार, भागीरथपुरा में एक्यूट डायरियल डिजीज से 20 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की गई थी और 459 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी गई थी। शुरुआती जांच में स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी का संबंध दूषित पानी से बताया था। इस घटना ने शहर की पेयजल आपूर्ति, पाइपलाइन के रखरखाव, पानी की नियमित जांच और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब लोग कह रहे हैं कि हो सकता है मंत्रीजी भागीरथपुरा की घटना से डर गए हों, इसलिए अपने घर में आरओ लगवा लिया है।

शहर को साफ पानी पिलाने की जिम्मेदारी किसकी?

इस पूरे मामले में एक बड़ा सवाल यह भी है कि इंदौर शहर के लोगों को साफ पानी पिलाने की जिम्मेदारी किसकी है? मंत्री विजयवर्गीय उस विभाग के मंत्री हैं, जिसकी जिम्मेदारी इंदौर ही नहीं पूरे मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में रहने वाले लोगों तक साफ पानी पहुंचाने की है। जब खुद मंत्री की विधानसभा में गंदे पानी से मौतें हो जाती हैं तो सवाल यह उठता है कि आखिर इनका विभाग करता क्या है? जो विभाग लोगों को पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध नहीं करा सकता, उसके मंत्री घर में लगे आरओ को दिखाकर क्या जनता के साथ मजाक नहीं कर रहे? क्या मंत्रीजी इंदौर के सभी मोहल्लों और बस्तियों में लोगों को आरओ का पानी उपलब्ध कराएंगे?


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