इंदौर स्थित ESIC मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के लगभग 45 इंटर्न डॉक्टर पिछले पांच महीने से स्टाइपेंड न मिलने की समस्या से जूझ रहे हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर इंटर्न डॉक्टरों ने कलेक्टर से शिकायत की है।

ESIC इंटर्न डॉक्टरों को पांच महीने से स्टाइपेंड नहीं मिला

ESIC मेडिकल कॉलेज के लगभग 45 इंटर्न डॉक्टरों को नियत ₹30,070 प्रति माह का स्टाइपेंड पांच महीने से नहीं मिला है। इस कारण डॉक्टरों ने 15 अक्टूबर 2026 को कॉलेज प्रशासन और डीन को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने 21 अक्टूबर तक भुगतान न होने पर हड़ताल की चेतावनी दी थी।

इंदौर ESIC इंटर्न डॉक्टरों को स्टाइपेंड न मिलने की समस्या

21 अक्टूबर से अस्पताल परिसर में शुरू हुई हड़ताल

समय सीमा समाप्त होने के बाद भी स्टाइपेंड जारी न होने पर 21 अक्टूबर 2026 से डॉक्टरों ने अस्पताल परिसर में हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई। इस हड़ताल का असर अस्पताल के कामकाज पर भी पड़ा है।

डॉक्टरों ने पुलिस कमिश्नर और कलेक्टर से शिकायत की

डॉक्टरों ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को भी ज्ञापन भेजकर अपनी स्थिति से अवगत कराया। इसके अलावा, उन्होंने पुलिस कमिश्नर और इंदौर के जिला कलेक्टर से भी शिकायत दर्ज कराई। इस दौरान बाइक रैली निकालकर उन्होंने अपनी समस्या पर ध्यान आकर्षित किया।

इंदौर ESIC इंटर्न डॉक्टरों को स्टाइपेंड न मिलने की समस्या

आवास और भोजन की समस्या से जूझ रहे इंटर्न डॉक्टर

इंटर्न डॉक्टरों के अनुसार, कॉलेज में हॉस्टल और मेस की सुविधा उपलब्ध नहीं है। जैसे इंटर्न आशीष गुप्ता ने बताया कि वे किराए के मकानों में रह रहे हैं। स्टाइपेंड न मिलने के कारण किराए और दैनिक खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।

ESIC नियमों के अनुसार स्टाइपेंड का महत्व

ESIC के नियमों के अनुसार इंटर्न डॉक्टरों को ₹30,070 प्रति माह स्टाइपेंड मिलना तय है। यह राशि उनकी रोजमर्रा की ज़रूरतें पूरी करने और मेडिकल प्रशिक्षण के दौरान आर्थिक सहायता के लिए होती है। स्टाइपेंड में देरी से डॉक्टरों की पढ़ाई और जीवनयापन दोनों प्रभावित होते हैं।

आगे क्या हो सकता है इस मामले में

डॉक्टरों की मांगों पर प्रशासन की प्रतिक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो हड़ताल लंबी हो सकती है, जिससे अस्पताल के मरीजों को भी प्रभावित होने का खतरा है। उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन जल्द स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाएगा।


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