इंदौर में 267 करोड़ रुपये के 4 फ्लायओवर का काम धीमा होने से शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या और बढ़ गई है। इस परियोजना के तहत बनाए जा रहे चार प्रमुख फ्लायओवरों का निर्माण तेजी से नहीं हो पा रहा है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
267 करोड़ के फ्लायओवर प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति
इंदौर में केंद्र सरकार की ‘सेतु बंधन योजना’ के अंतर्गत ₹267 करोड़ की लागत से 4 सिक्स-लेन फ्लायओवर बनाए जा रहे हैं। ये फ्लायओवर देवास नाका, मूसाखेड़ी, क्रिस्टल आईटी पार्क और सत्यसाईं चौराहा पर बन रहे हैं। निर्माण कार्य मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) द्वारा संचालित है। फिलहाल, देवास नाका फ्लायओवर में 68% काम पूरा हुआ है, जबकि मूसाखेड़ी में 61%, सत्यसाईं चौराहा में 55% और क्रिस्टल आईटी पार्क फ्लायओवर में 54% कार्य पूरा हुआ है।
फ्लायओवर निर्माण की देरी से ट्रैफिक जाम में वृद्धि
फ्लायओवर के निर्माण में गर्डर कास्टिंग, एप्रोच रोड और डामरीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य अभी अधूरे हैं। इस कारण ट्रैफिक का सुचारू संचालन 2027 तक भी संभव नहीं दिख रहा है, जबकि परियोजना की आधिकारिक पूर्णता तिथि दिसंबर 2026 तय की गई है। निर्माण स्थलों पर खराब सर्विस रोड, गड्ढे और उड़ती धूल ने यातायात को और जामग्रस्त बना दिया है।
ट्रैफिक जाम के कारण आम आदमी पर असर
ट्रैफिक जाम की वजह से दैनिक आवागमन में लोगों को घंटों लगने लगे हैं। खासकर पीक ऑवर्स के दौरान यातायात बेहद धीमा हो जाता है। इसके अलावा, उड़ती धूल और संकरी सड़कें स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ा रही हैं। व्यवसायिक और शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं, जिससे शहर की आर्थिक गतिशीलता पर असर पड़ रहा है।

निर्माण में बाधाएं और प्रशासन की समीक्षा
इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा ने हाल ही में निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया है। उन्होंने प्रशासनिक एवं ट्रैफिक अधिकारियों को छोटे-मोटे अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, ट्रैफिक जाम से राहत के लिए समर्पित ट्रैफिक गार्ड्स की तैनाती का भी आदेश दिया गया है। यह कदम जाम कम करने और निर्माण कार्य को तेजी से पूरा कराने के लिए जरूरी माना जा रहा है।
फ्लायओवर निर्माण की देरी के संभावित कारण
काम की धीमी गति के पीछे विभिन्न कारण हो सकते हैं जैसे तकनीकी चुनौतियां, सामग्री की आपूर्ति में देरी, मौसम की बाधाएं और प्रशासनिक अड़चनें। इसके अलावा, निर्माण स्थल पर यातायात का प्रबंधन भी कठिनाई पैदा कर रहा है। इन सभी कारणों के कारण परियोजना निर्धारित समय सीमा में पूरी नहीं हो पा रही है।
आगे क्या हो सकता है और उम्मीदें
काम की धीमी गति पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन और निर्माण एजेंसी को मिलकर तेजी से कार्रवाई करनी होगी। यदि छोटे अतिक्रमण हटाए गए और ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर हुआ तो परियोजना समय पर पूरी हो सकती है। इससे न केवल ट्रैफिक जाम कम होगा, बल्कि इंदौर की सड़कों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। फिलहाल, आम नागरिकों को धैर्य रखना होगा और प्रशासन से सहयोग की अपेक्षा करनी चाहिए।
