भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अक्टूबर 2026 की बैठक में रेपो रेट बढ़ाने पर विचार किया, लेकिन इसमें पूर्ण सहमति नहीं बन पाई। इसके बावजूद, एमपीसी के मिनट्स से संकेत मिले हैं कि यदि मुद्रास्फीति का दबाव बना रहता है, तो RBI भविष्य में रेपो रेट बढ़ाने का फैसला कर सकता है।

एमपीसी ने 4 साल बाद पहली बार बढ़ाई रेपो रेट

मौद्रिक नीति समिति ने अक्टूबर 2026 में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की वृद्धि कर इसे 5.50% कर दिया। यह लगभग चार वर्षों के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी है। महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

रेपो रेट बढ़ाने का मकसद महंगाई को काबू में रखना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है। इससे उधारी महंगी होगी और मांग पर नियंत्रण आएगा।

एमपीसी में सदस्यों के बीच असहमति

इस बैठक में समिति के सदस्य रेपो रेट के विषय पर एकमत नहीं थे। कुछ सदस्यों ने तत्काल दरें बढ़ाने का समर्थन किया। खासकर बाहरी सदस्य पूनम गुप्ता ने महंगाई के बढ़ते दबाव के मद्देनजर इसे जरूरी बताया।

वहीं, अन्य सदस्यों ने आर्थिक विकास दर पर असर पड़ने के कारण सतर्कता बरतने की वकालत की। इस प्रकार, एमपीसी में ब्याज दरों को लेकर सहमति नहीं बन सकी।

रेपो रेट बढ़ाने के बाद महंगाई पर नजर

मौद्रिक नीति समिति के मिनट्स के अनुसार, यदि मुद्रास्फीति का दबाव जारी रहता है, तो RBI रेपो रेट में और बढ़ोतरी कर सकता है। यह संकेत आगामी आर्थिक नीतियों पर असर डाल सकता है।

महंगाई पर नियंत्रण के लिए RBI की यह नीति जरूरी मानी जा रही है। हालांकि, इस कदम से उधार लेने वाले उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर असर पड़ेगा।

आम आदमी पर रेपो रेट बढ़ोतरी का प्रभाव

रेपो रेट बढ़ने से बैंकों के कर्ज महंगे हो जाएंगे। इसका सीधा असर होम लोन, कार लोन और क्रेडिट कार्ड पर पड़ेगा। आम लोगों के लिए EMI बढ़ सकती है।

इसके अलावा, महंगाई को काबू में रखने के प्रयास के चलते वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में स्थिरता आ सकती है, जो आर्थिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का नेतृत्व

यह निर्णय RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली 6-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने लिया। उनकी अगुवाई में, समिति ने आर्थिक परिस्थितियों का विश्लेषण कर यह कदम उठाया।

गवर्नर के नेतृत्व में RBI ने वित्तीय स्थिरता और मुद्रास्फीति नियंत्रण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।

दिसंबर में फिर हो सकती है दरों में बढ़ोतरी

विशेषज्ञों का अनुमान है कि मुद्रास्फीति के रुख को देखते हुए दिसंबर 2026 में होने वाली अगली द्विमासिक बैठक में भी रेपो रेट बढ़ाने की संभावना है।

यह कदम आर्थिक स्थिरता और महंगाई नियंत्रण दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसलिए, बाजार और आम जनता को आगामी नीतिगत फैसलों पर नजर रखनी होगी।


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