गोवा की राजधानी पणजी में 11 अक्टूबर 2026 को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान लगाए गए “हिंदुत्व मुर्दाबाद” के नारे विवाद का केंद्र बने हैं। इस मामले में 300 से अधिक अज्ञात लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है, जो कि प्रदर्शन में शामिल कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके समर्थकों से जुड़े हैं। यह विरोध प्रदर्शन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ था, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी।
गोवा में CJP विरोध प्रदर्शन और विवादित नारेबाजी
पणजी के आजाद मैदान में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने “हिंदुत्व मुर्दाबाद” के नारे लगाए। इस नारे की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिससे विवाद बढ़ गया। पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की। विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करना था, लेकिन नारेबाजी ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।

पुलिस की एफआईआर और कानूनी कार्रवाई
पणजी पुलिस ने 300 से अधिक अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 196 और धारा 299 के तहत एफआईआर दर्ज की है। ये धाराएं धार्मिक असंतोष फैलाने और जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को आहत करने से संबंधित हैं। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की गई है ताकि धार्मिक सौहार्द कायम रहे।
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत का बयान और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने इस नारेबाजी की कड़ी निंदा की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच की जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि जो भी लोग धार्मिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। सरकार ने इसे एक गंभीर मामला बताया है और शांति बनाए रखने पर जोर दिया है।
CJP गोवा इकाई की सफाई और विवाद से दूरी
विवाद बढ़ने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी की गोवा इकाई ने 15 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी किया। इसमें उन्होंने “हिंदुत्व मुर्दाबाद” के नारों से खुद को पूरी तरह अलग बताया। CJP ने कहा कि वे किसी भी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने वाले नारों का समर्थन नहीं करते और ऐसे कार्यकर्ताओं की पहचान कर उचित कदम उठाएंगे।
मतदाता सूची पुनरीक्षण की पृष्ठभूमि और प्रदर्शन का कारण
इस विरोध प्रदर्शन का मूल कारण मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताएं थीं। प्रदर्शनकारी दावा कर रहे थे कि इस प्रक्रिया में पक्षपात और गलतियां हुई हैं। इसलिए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। यह मामला गोवा की राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता के लिए संवेदनशील बना हुआ है।
आगे की संभावनाएं और आम जनता पर प्रभाव
इस विवाद के बाद गोवा में शांति बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौती होगी। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले मामलों में सख्त कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। आम जनता में इस तरह के विवादों से सामाजिक तनाव और अस्थिरता का खतरा होता है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि जांच के बाद उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे और स्थिति नियंत्रण में रखी जाएगी।
