कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस के मौके पर आरएसएस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को ‘विशुद्ध पुरुषवादी’ और ‘संविधान विरोधी’ संगठन करार दिया। राहुल गांधी के इस बयान में महिलाओं के प्रति आरएसएस की सोच को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए। इस तरह का बयान राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

राहुल गांधी ने कहा मैं शिव शक्ति में विश्वास करता हूं

राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा, “मैं शिव-शक्ति में विश्वास करता हूं, इसलिए मुझे आरएसएस से लड़ने में खुशी मिलती है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि संघ और भाजपा की विचारधारा से जुड़े कई परिवारों की महिलाएं भी उनकी इस लड़ाई में उनके साथ हैं। यह बयान नागपुर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी भाषण के कुछ ही समय बाद आया है। राहुल गांधी ने संघ की विचारधारा को महिलाओं को पुरुषों की संपत्ति मानने वाला बताया।

राहुल गांधी का शिव शक्ति में विश्वास और आरएसएस पर तीखा हमला

आरएसएस को पुरुषवादी और संविधान विरोधी करार

राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को एक ऐसा संगठन बताया जो केवल पुरुषों का समूह है और जो भारत के संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ काम करता है। उन्होंने कहा कि आरएसएस की सोच महिलाओं को पुरुषों की संपत्ति मानती है, जो सामाजिक और संवैधानिक दृष्टि से गलत है। इस आरोप ने राजनीतिक बहस को और अधिक गरमाहट दी है, खासकर संघ की शताब्दी वर्ष की वर्षगांठ पर यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मोहन भागवत का वार्षिक विजयादशमी भाषण और उसका असर

नागपुर में आरएसएस के स्थापना दिवस पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने विजयादशमी भाषण दिया। इस भाषण में उन्होंने संघ, संविधान, हिंदू धर्म और देश के विकास पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने तुष्टिकरण की नीति पर भी टिप्पणी की। भागवत के भाषण को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समर्थन दिया और इसे राष्ट्रीय प्रगति और सामाजिक एकजुटता की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। इस भाषण के बाद राहुल गांधी का तीखा हमला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना।

भाजपा सांसद ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाए

राहुल गांधी के बयान के जवाब में भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने उनके हालिया वियतनाम दौरे पर सवाल उठाए। उन्होंने राहुल गांधी से उनकी विदेश यात्राओं के खर्च और वहां की मुलाकातों का सार्वजनिक ब्योरा देने की मांग की। इस तरह दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है। यह विवाद आगामी चुनावी रणनीतियों पर भी असर डाल सकता है।

आम जनता पर इस बयान का प्रभाव और भविष्य की राजनीति

राहुल गांधी के आरएसएस पर इस तीखे हमले से राजनीतिक माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है। आम जनता के बीच यह बयान महिला अधिकारों और संविधान के प्रति संवेदनशीलता को लेकर चर्चा बढ़ा सकता है। वहीं, राजनीतिक दलों की सक्रियता और बयानबाजी से आगामी समय में चुनावी रणनीतियों में बदलाव देखने को मिल सकता है। इस बयान ने सियासी विमर्श की दिशा को स्पष्ट रूप से प्रभावित किया है।

राहुल गांधी के बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर

राहुल गांधी के बयान के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। भाजपा ने आरोपों को निराधार बताया है और कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। वहीं, अन्य विपक्षी दल इस बयान का समर्थन कर रहे हैं। इस राजनीतिक गतिरोध से देश की सामाजिक और राजनीतिक एकता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। आने वाले दिनों में इस विवाद का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव और स्पष्ट होगा।


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