उज्जैन के गंभीर डैम में केवल 27% पानी बचा है, जिससे गर्मियों में जल संकट का खतरा बढ़ गया है। गंभीर डैम उज्जैन शहर की जलापूर्ति का प्रमुख स्रोत है और इसके जलस्तर में लगातार गिरावट ने स्थानीय निवासियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
गंभीर डैम की वर्तमान जल स्थिति और गिरता जलस्तर
गंभीर डैम की कुल क्षमता 2,250 एमसीएफटी है, लेकिन 24 अक्टूबर 2026 तक इसमें केवल 612.580 एमसीएफटी पानी बचा है। यह कुल क्षमता का लगभग 27% ही है। सिर्फ आठ दिनों में जलस्तर में 14.872 एमसीएफटी की गिरावट दर्ज की गई, जो चिंता का विषय है। लगातार घटते जलस्तर ने जल संकट के संकेत और मजबूत कर दिए हैं।

गंभीर डैम में जलस्तर गिरने के कारण
कम बारिश और अधिक वाष्पीकरण मुख्य कारण हैं। जीवाजी वेधशाला के अनुसार, इस मानसून में उज्जैन में औसत 906 मिमी बारिश की जगह केवल 682 मिमी बारिश हुई। यानी सामान्य से लगभग 25% कम बारिश हुई। इसके अलावा, गर्मी में तापमान बढ़ने से पानी का वाष्पीकरण भी रोजाना 7 से 8 एमसीएफटी के बीच हो रहा है।
उज्जैन की आबादी और गंभीर डैम पर निर्भरता
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की रिपोर्ट के मुताबिक, उज्जैन शहर की करीब 7 लाख आबादी की लगभग 95% जलापूर्ति गंभीर डैम से होती है। इस पर निर्भरता के कारण जलस्तर में कमी से सीधे तौर पर आम जनता के लिए पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है।

नर्मदा जल परियोजना के तहत बड़े निवेश और प्रयास
गंभीर डैम के घटते जल स्तर की भरपाई के लिए नर्मदा नदी से पानी लाने की परियोजना पर ₹365 करोड़ से अधिक खर्च हो चुका है। इसके जरिए जल संकट को कम करने और वैकल्पिक जल आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिशें जारी हैं। गऊघाट जल शोधन प्लांट से भी जलापूर्ति बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं।
जल संकट के संभावित प्रभाव और तैयारियां
अगर गंभीर डैम में जलस्तर इसी प्रकार घटता रहा, तो उज्जैन में आगामी गर्मियों में पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है। इससे न केवल घरेलू उपयोग प्रभावित होगा, बल्कि उद्योग और कृषि क्षेत्र भी जल संकट से ग्रस्त हो सकते हैं। प्रशासन ने वैकल्पिक जल स्रोतों को सक्रिय करने के साथ ही जल संरक्षण उपायों को भी प्राथमिकता दी है।
जल संरक्षण और समुदाय की भूमिका
गंभीर डैम के जलस्तर में कमी को रोकने के लिए जल संरक्षण अनिवार्य है। आम नागरिकों को भी पानी की बचत के उपाय अपनाने होंगे। इसके अलावा, वर्षा जल संचयन जैसी तकनीकों को अपनाकर जल संकट को कम किया जा सकता है। सामूहिक प्रयास से ही उज्जैन के गंभीर डैम की स्थिति सुधारी जा सकती है।
