चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश के यनम तट के निकट लैंडफॉल कर दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, यह चक्रवात 28 अक्टूबर 2026 की सुबह या दोपहर तक आंध्र प्रदेश के बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट से टकराया। चक्रवात अर्नब के लैंडफॉल के समय हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रही, जबकि झोंके 140 से 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गए।
आंध्र प्रदेश में चक्रवात अर्नब के कारण हाई अलर्ट जारी
चक्रवात अर्नब के कारण आंध्र प्रदेश के 16 जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। इनमें बापटला, काकीनाडा, विशाखापत्तनम और कृष्णा जैसे तटीय जिले शामिल हैं। इन जिलों में भारी बारिश और तूफानी हवाओं की चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए हैं और प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य शुरू कर दिए गए हैं।
स्कूलों और कॉलेजों को बंद कर दिया गया है। इसके अलावा, रेल सेवाओं में भी व्यापक रद्दीकरण और डायवर्शन किया गया है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में 50 से अधिक ट्रेनें रद्द या मार्ग बदला गया है ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

ओडिशा और अन्य राज्यों में भी चक्रवात अर्नब का प्रभाव
चक्रवात अर्नब का असर केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं है। ओडिशा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल के तटीय और दक्षिणी हिस्सों में भी भारी से अत्यंत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। ओडिशा के कई जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी बरसात के कारण प्रशासन ने रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
इन राज्यों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें तैनात की गई हैं। मछुआरों को समुद्र में जाने से मना किया गया है, जबकि कमजोर इलाकों से लोगों की निकासी की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
चक्रवात अर्नब का नाम और उत्पत्ति
चक्रवात अर्नब का नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन की सूची के अनुसार बांग्लादेश ने दिया है। बंगाल की खाड़ी में उठने वाले इस चक्रवात ने बहुत तेजी से प्रचंड रूप ले लिया। इसकी तीव्रता और गति के कारण इसे अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
चक्रवात के नामकरण का उद्देश्य जनता को चेतावनी देना और आपदा प्रबंधन को बेहतर बनाना है। समय रहते अलर्ट जारी करने से नुकसान कम करने में मदद मिलती है।

चक्रवात अर्नब की तैयारी और राहत कार्य
चक्रवात अर्नब से निपटने के लिए आंध्र प्रदेश और ओडिशा सरकारों ने व्यापक तैयारी की है। तटीय और निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है। एनडीआरएफ की कई टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं।
सरकारी और स्थानीय प्रशासन के अलावा स्वयंसेवी संस्थाएं भी राहत कार्यों में सक्रिय हैं। मछुआरों को समुद्र में जाने से मना किया गया है और आम जनता को मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की हिदायत दी गई है।
चक्रवात अर्नब के बाद के संभावित प्रभाव
चक्रवात अर्नब के तट से टकराने के बाद यह कमजोर होकर उत्तर की ओर बढ़ सकता है। इसके चलते तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी बारिश होने की संभावना है। तेज हवाओं और भारी बारिश से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना रहेगा।
इस समय आम जनता को सतर्क रहना आवश्यक है। प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना और सुरक्षित स्थानों पर रहना ही नुकसान को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय है।
