लोकायुक्त जांच के बाद ED की एंट्री संभव मामले में फिरोज खान पर मनी लॉन्ड्रिंग केस की गंभीरता बढ़ रही है। इंदौर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ प्रधान आरक्षक फिरोज खान के खिलाफ भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति मामले में लोकायुक्त ने 14 अक्टूबर 2026 को बड़े पैमाने पर छापेमारी की। इस जांच से जुड़े तथ्य अब तक संपत्ति, बैंक खातों और वित्तीय सौदों की विस्तृत पड़ताल कर रहे हैं।
फिरोज खान के खिलाफ लोकायुक्त की व्यापक जांच
लोकायुक्त पुलिस ने फिरोज खान के इंदौर और देवास के 15 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर 51 से अधिक अचल संपत्तियों की पहचान की है। इन संपत्तियों की अनुमानित बाजार कीमत ₹64 से ₹68 करोड़ के बीच आंकी गई है। यह संपत्तियां फिरोज खान और उनके परिवार के सदस्यों व परिचितों के नाम पर दर्ज हैं। इसके अलावा, जांच में 21 बैंक खातों और 9 वाहनों की भी जानकारी मिली है।
फिरोज खान की सेवा अवधि और वैध आय का विवरण
फिरोज खान पुलिस विभाग में 24 वर्षों से कार्यरत हैं। लोकायुक्त की जांच के अनुसार उनकी वैध सेवा आय ₹75 लाख से ₹1.93 करोड़ के बीच है। हालांकि, उनकी संपत्ति की कुल कीमत इस आय से कहीं अधिक पाई गई है। यह अंतर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर आरोपों को जन्म देता है, क्योंकि यह आय से अधिक संपत्ति रखने के अंतर्गत आता है।
संपत्तियों के नाम पर परिवार और संबंधित लोग
जांच में फिरोज खान की पत्नी हिना खान, मां वहीदा खान, बेटी जैफी खान और महिला मित्र रोशनी वर्मा के नाम सामने आए हैं। देवास में नीलामी के माध्यम से ₹92 लाख के दो प्लॉट और उज्जैन रोड पर ₹9 करोड़ की भूमि के सौदे भी जांच के दायरे में हैं। ये सौदे आय के स्रोतों और खरीद के वित्तीय लेन-देन की गहन समीक्षा के अधीन हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप और ED की संभावित जांच
फिरोज खान के मामले में लोकायुक्त जांच में भारी मात्रा में हवाला और संदिग्ध वित्तीय कंपनियों से पैसों के लेन-देन के प्रमाण मिले हैं। इसलिए, भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंपे जाने की प्रक्रिया जारी है। इसका उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का पता लगाना है।
आम जनता पर संभावित प्रभाव और कानूनी प्रक्रिया
इस मामले से आम जनता का विश्वास सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता को लेकर प्रभावित हो सकता है। भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप सरकारी कर्मचारियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं। कानूनी प्रक्रिया में लोकायुक्त की जांच और ED की संभावित जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन होगा। इसके बाद ही कोर्ट में चालान पेश किया जाएगा।
आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई के चरण
लोकायुक्त की जांच संपत्तियों, बैंक खातों और वित्तीय दस्तावेजों की विस्तृत पड़ताल कर रही है। यदि जांच में संपत्ति और आय के स्रोतों के बीच संबंध स्थापित होता है, तो ED मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कार्रवाई कर सकता है। इस प्रक्रिया में संपत्तियों की अस्थायी कुर्की और अभियोजन की संभावना भी बनती है। हालांकि, सभी कानूनी प्रावधानों और न्यायिक परीक्षणों का पालन आवश्यक होगा।
