हार्वर्ड प्रोफेसर्स भी हुए महाकुंभ के मुरीद, बताया परंपरा और तकनीक का अद्भुत संगम
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों ने दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन महाकुंभ की भव्यता और इसके प्रबंधन की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।
- Published On :
27-Feb-2025
(Updated On : 27-Feb-2025 10:56 am )
हार्वर्ड प्रोफेसर्स भी हुए महाकुंभ के मुरीद, बताया परंपरा और तकनीक का अद्भुत संगम
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों ने दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन महाकुंभ की भव्यता और इसके प्रबंधन की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। उनका मानना है कि महाकुंभ सिर्फ एक आध्यात्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि धर्म, वाणिज्य, परंपरा और तकनीक के अद्भुत संगम का जीवंत उदाहरण भी है।
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न्यूयॉर्क में हुआ विशेष कार्यक्रम
अमेरिका के न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूतावास द्वारा आयोजित कार्यक्रम 'इनसाइट फ्रॉम वर्ल्ड लार्जेस्ट स्प्रिचुअल गैदरिंग - महाकुंभ' में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के कई प्रतिष्ठित प्रोफेसरों ने भाग लिया। इनमें हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर पाउलो लेमन, हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल की प्रोफेसर डायना ईसीके, प्रोफेसर तरुण खन्ना और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की प्रोफेसर तियोना जुजुल शामिल रहीं।
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महाकुंभ में परंपरा और तकनीक का संगम
हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर तरुण खन्ना ने कहा कि उन्हें यह देखकर हैरानी होती है कि महाकुंभ परंपरा और आधुनिक तकनीक के बेहतरीन संगम का प्रतीक बन गया है। उन्होंने कहा, "महाकुंभ में धर्म और तकनीक एक साथ चलते हैं, और इसी तरह से कोई समाज विकसित होता है।" उन्होंने इस आयोजन में स्वच्छता प्रबंधन और प्रशासनिक दक्षता की जमकर सराहना की।
तेजी से विकसित होता आयोजन क्षेत्र
हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल की प्रोफेसर डायना ईसीके ने इस बात की प्रशंसा की कि बेहद कम समय में विशाल मेला क्षेत्र तैयार किया जाता है और उसमें सभी आधुनिक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
अर्थव्यवस्था और रसद प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण
साल 2013 के महाकुंभ में शामिल रहीं प्रोफेसर तियोना जुजुल ने इस आयोजन में अर्थव्यवस्था और व्यापार के आध्यात्मिकता से गहरे संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में रसद आपूर्ति की जटिल चुनौतियों से जिस तरह से निपटा जाता है, वह प्रबंधन का बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि वे 2037 में फिर से महाकुंभ में शामिल होने भारत आएंगी।
66 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई पवित्र डुबकी
गौरतलब है कि 13 जनवरी 2025 से शुरू हुए महाकुंभ में अब तक 66 करोड़ श्रद्धालु पवित्र संगम में स्नान कर चुके हैं। बुधवार को महाशिवरात्रि के पावन स्नान के साथ इस भव्य आयोजन का समापन होगा।
महाकुंभ न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि व्यापक प्रशासन, स्वच्छता, व्यापार और आधुनिक प्रबंधन तकनीकों के सफल क्रियान्वयन का भी उत्कृष्ट उदाहरण है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के विद्वानों की यह सराहना यह दर्शाती है कि महाकुंभ सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि एक अद्वितीय अनुभव है, जो दुनिया को आध्यात्मिकता और प्रबंधन का संगम सिखाता है।
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