इंदौर। इंदौर का बीआरटीएस अब हटेगा। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस पर अपनी सहमति जता दी है। कुछ महीने पहले सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा था लोगों की परेशानी को देखते हुए इसे हटाने का फैसला लिया था। सीएम ने कहा था सरकार कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखेगी। भोपाल में बीआरटीएस हटाने का फैसला पहले ही ले लिया गया था।
उल्लेखनीय है कि निरंजनपुर से राजीव गांधी प्रतिमा तक करीब 11.5 किमी लंबा बीआरटीएस बना हुआ है। इसे लेकर दो जनहित याचिकाएं हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में लगी थीं, जिसे हाईकोर्ट की मुख्य पीठ (जबलपुर) ट्रांसफर कर दिया गया था। इसके बाद आज जबलपुर हाईकोर्ट ने इंदौर के बीआरटीएस को हटाने को लेकर निर्णय सुनाया है।
कमेटी की रिपोर्ट के बाद फैसला
हाईकोर्ट ने बीआरटीएस प्रोजेक्ट की उपयोगिता और व्यवहारिकता की जांच के लिए पांच सदस्यों की कमेटी बनाने के निर्देश दिए थे। इसमें वरिष्ठ अभिभाषक अमित अग्रवाल के साथ ही आईआईएम और आईआईटी के डायरेक्टर की ओर से नामित विशेषज्ञ शामिल थे। बताया जाता है कि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट मे रखी इसमें कहा कि इंदौर का बीआरटीएस वर्तमान परिस्थिति में अपनी उपयोगिता खो चुका है। इसकी वजह से अक्सर जाम की स्थिति बनती है। मुख्यमंत्री खुद इसे तोड़ने की घोषणा कर चुके हैं। याचिका में भी बीआरटीएस को तोड़ने की मांग है। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट की युगलपीठ ने बीआरटीएस तोड़ने के सरकार के फैसले पर मुहर लगा दी।
बीआरटीएस पर खर्च हुए थे 300 करोड़
इंदौर में 300 करोड़ रुपए की लागत से 11.5 किलोमीटर लंबा बीआरटीएस दस साल पहले शुरू हुआ था। इसकी बस लेन में 12 स्टेशन भी बनाए गए हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए जवाहर लाल शहरी नवीनीकरण मिशन के तहत इंदौर को राशि मिली थी। बस के लिए विशेष लेन बनाने का कुछ लोगों ने विरोध भी किया था और मामला हाईकोर्ट में भी है।
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