पीएम मोदी मई में करेंगे रूस दौरा, मॉस्को की 'ग्रेट पैट्रियोटिक वॉर' परेड में होंगे विशेष अतिथि
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल मई में रूस का दौरा कर सकते हैं।
- Published On :
28-Feb-2025
(Updated On : 28-Feb-2025 10:54 am )
पीएम मोदी मई में करेंगे रूस दौरा, मॉस्को की 'ग्रेट पैट्रियोटिक वॉर' परेड में होंगे विशेष अतिथि
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल मई में रूस का दौरा कर सकते हैं। रूसी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मॉस्को के रेड स्क्वायर पर आयोजित होने वाली 80वीं ग्रेट पैट्रियोटिक वॉर परेड में पीएम मोदी विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस प्रतिष्ठित आयोजन में भारतीय सेना का एक दल भी भाग ले सकता है, जो परेड से एक महीने पहले रूस जाकर इसकी तैयारियों में हिस्सा लेगा।
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रूस का विशेष आमंत्रण और वैश्विक भागीदारी
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पुष्टि की है कि कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों को इस परेड में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है और कुछ ने अपनी उपस्थिति की पुष्टि भी कर दी है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी इसकी जानकारी साझा की।
क्या है ग्रेट पैट्रियोटिक वॉर?
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान रूस और नाजी जर्मनी के बीच लड़ा गया युद्ध ‘ग्रेट पैट्रियोटिक वॉर’ के नाम से जाना जाता है। यह युद्ध 22 जून 1941 से 9 मई 1945 तक चला और इसे मानव इतिहास के सबसे बड़े और खूनी युद्धों में से एक माना जाता है। इस युद्ध की समाप्ति नाजी जर्मनी की हार और रूस के एक बड़ी सैन्य शक्ति के रूप में उभरने के साथ हुई थी।
भारत-रूस संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण दौरा
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पीएम मोदी ने पिछले साल अक्टूबर में भी रूस का दौरा किया था, जब वे रूस की अध्यक्षता में आयोजित 16वें ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल हुए थे।
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उनका यह संभावित दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम को लेकर बातचीत जारी है। दोनों देशों के बीच पहले चरण की वार्ता रियाद, सऊदी अरब में हुई थी।
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भारत ने शुरू से ही रूस-यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की अपील की है, और इस दौरे के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है।
भारत-रूस सैन्य सहयोग को मिलेगी मजबूती
भारतीय सेना की परेड में संभावित भागीदारी से भारत और रूस के बीच सैन्य सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह दौरा वैश्विक राजनीति में भारत की बैलेंस्ड डिप्लोमैसी की झलक भी दिखाएगा, क्योंकि भारत पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को भी संतुलित रखता है।
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