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बकाया जीएसटी की रिकवरी के नए प्रावधान, कुछ प्रक्रिया अपनाकर बच सकते हैं टैक्सपेयर

अंडरटेकिंग में देनी होगी कई जानकारी

 

नई दिल्ली। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीआईसी) ने जीएसटी बकाए की रिकवरी के लिए नए प्रावधानों को जारी किया है। ये प्रावधान तब तक के लिए हैं, जब तक कि जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण काम नहीं करने लग जाता है। नए प्रावधानों के जारी होने से टैक्सपेयर्स को सहूलियत होने वाली है।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडाइरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (सीबीआईसी) ने जीएसटी बकाए के नए प्रावधानों को लेकर सर्कुलर जारी किया है। इसके अनुसार जब तक गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (जीएसटीएटी) फंक्शनल नहीं हो जाता है, इन प्रावधानों के जरिए काम होगा। अभी टैक्सपेयर टैक्स की रिकवरी की प्रक्रिया से बचने के लिए अपनी इलेक्ट्रॉनिक लायबिलिटी रजिस्टर के जरिए प्री-डिपॉजिट अमाउंट का भुगतान कर सकते हैं और न्यायाधिकार क्षेत्र के हिसाब से उचित अधिकारी के समक्ष अंडरटेकिंग फाइल कर सकते हैं।

कॉमन पोर्टल पर दी गई सुविधा

सीबीआईसी ने यह सर्कुलर टैक्सपेयर को ट्रिब्यूनल के फंक्शनल होने तक रिकवरी की गैर-जरूरी प्रक्रिया से बचाने के लिए जारी किया है। सर्कुलर के अनुसार, जीएसटी के कॉमन पोर्टल पर फॉर्म जीएसटी डीआरसी-03 के जरिए भुगतान को एडजस्ट करने की एक नई व्यवस्था शुरू की गई है, जो प्री-डिपॉजिट की जरूरतों के लिए है।

अंडरटेकिंग में बतानी होगी ये बात

टैक्सपेयर इस नई सुविधा के तहत भुगतान कर सकते हैं। उसके बाद वे संबंधित अधिकारी को भुगतान की जानकारी दे सकते हैं, जो रिकवरी की प्रक्रिया को देर करेंगे यानी टालेंगे। टैक्सपेयर को अंडरटेकिंग में ये भी बताना होगा कि वह संबंधित बकाया ऑर्डर के खिलाफ अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अपील दायर करेगा। अपील जीएसटीएटी के फंक्शनल होते ही सीजीएसटी एक्ट के सेक्शन 112 में बताई गई समयावधि के अंदर फाइल की जाएगी।

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